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टैग्स: गीत्


ब्लॉग्स (2)
मन तपस्वी बना देखता ही रहा,दर्द् ने गीत् पे हस्ताक्षर किए.आस्था की दवा गिर गयी हाथ से,दूर साथी हुए साथ थे जो मेरे !*********अनचेते अमलतास नन्हेंकतिपय पलाश।रेणु सने शिशुओं-सीनयनों में लिए आस।।अनचेते चेतेंगेंसावन में नन्हेंइतराएँगे आँगन मेंपालो दोनों को ढँक ... आगे पढ़ें...

आ ओ मीत लौट चलें गीत को सुधार लें वक़्त अर्चना का है -आ आरती संवार लें ।भूल हो गई कोई गीत में कि छंद में या हुआ तनाव कोई , आपसी प्रबंध में भूल उसे मीत मेरे सलीके से सुधार लें !छंद का प्रबंध मीत ,अर्चना के पूर्व हो समवेती सुरों का अनुनाद भी अपूर्व हो,अपनी ... आगे पढ़ें...