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टैग्स: गिरीश


ब्लॉग्स (7)

यह सही नहीं कि समीर लाल जी मोदीवाडा सदर में लुकमान को सुनते थे , खासतौर पर होली ? ऐसा नहीं था जहाँ भी चचा का प्रोग्राम होता भाई समीर की उड़न-प्लेट सम्भवत:वेस्पा स्कूटर पर सवार हो कर चली आती थी .अवगत करना चाहूंगा कि:- पंडित भवानी प्रसाद तिवारी जी ,के बाद ... आगे पढ़ें...

अदेह के सदेह प्रश्न कौन गढ़ रहा कहोगढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ?मुझे जिस्म मत कहो चुप रहो मैं भाव हूँतुम जो हो सूर्य तो रश्मि हूँ प्रभाव हूँ !!मुझे सदा रति कहो ? लिखा है किस किताब मेंदेह पे ही हो बहस कहा है किस जवाब मेंनारी हैं बस देह नहीं प्रचंड ... आगे पढ़ें...

मन तपस्वी बना देखता ही रहा,दर्द् ने गीत् पे हस्ताक्षर किए.आस्था की दवा गिर गयी हाथ से,दूर साथी हुए साथ थे जो मेरे !*********अनचेते अमलतास नन्हेंकतिपय पलाश।रेणु सने शिशुओं-सीनयनों में लिए आस।।अनचेते चेतेंगेंसावन में नन्हेंइतराएँगे आँगन मेंपालो दोनों को ढँक ... आगे पढ़ें...

आओ मुझे बदनाम करो.....!!". "आओ मुझे बदनाम करो.....!!" उस दिन शहर के अखबार समाचार पत्रों में रंगा था समाचार "श्रींमन क के विरुद्ध जन शिकायतों को लेकर हंगामा, श्रीमान ख के नेतृत्व में आला अधिकारीयों को ... आगे पढ़ें...

इस बीहड़ से गुज़रते मुझे बड़े ही डरावने से लगे थेओ समयतुम जो प्रिया के इंतज़ार के वक्तकितने अपने से .......?समय तुम ही न थे जो मुझे अपमानित कर गए थेहाँ तब जब माँ का शव लाया गयाऔर उभर आयीं थीनिस्तब्धाताएं एक साथ मेरे साथ तुम भी रुदन कर रहे थेहाँ और तब भी ... आगे पढ़ें...

चिट्ठा-चर्चा" के बहाने :एक चर्चा और ! परहुई टिप्पणीपार सनेह प्रिय अज्ञातानंद जीसादर-अभिवादनआपका ख़त मिला पड़कर दुःख हुआ कि आप का ज़िक्र नही कर पाया अपनी एक पोस्ट पर भाई साहब ये सही है कि आपका भेजा हुआ वेतन जो ब्लॉगर की हैसियत से लिखने के लिए ... आगे पढ़ें...