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टैग्स: कविता


ब्लॉग्स (6)
अदेह के सदेह प्रश्न कौन गढ़ रहा कहोगढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ?मुझे जिस्म मत कहो चुप रहो मैं भाव हूँतुम जो हो सूर्य तो रश्मि हूँ प्रभाव हूँ !!मुझे सदा रति कहो ? लिखा है किस किताब मेंदेह पे ही हो बहस कहा है किस जवाब मेंनारी हैं बस देह नहीं प्रचंड ... आगे पढ़ें...

मन तपस्वी बना देखता ही रहा,दर्द् ने गीत् पे हस्ताक्षर किए.आस्था की दवा गिर गयी हाथ से,दूर साथी हुए साथ थे जो मेरे !*********अनचेते अमलतास नन्हेंकतिपय पलाश।रेणु सने शिशुओं-सीनयनों में लिए आस।।अनचेते चेतेंगेंसावन में नन्हेंइतराएँगे आँगन मेंपालो दोनों को ढँक ... आगे पढ़ें...

"विषय ,जो उगलतें हों विषउन्हें भूल के अमृत बूंदों कोउगलतेकभी नर्म मुलायम बिस्तर सेसहज ही सम्हलतेविषयों पर चर्चा करेंअपने "दिमाग" मेंकुछ बूँदें भरें !विषय जो रंग भाषा की जातिगढ़तें हैं ........!वो जो अनलिखा पढ़तें हैं ...चाहतें हैं उनको हम भूल जाएँकिंतु ... आगे पढ़ें...