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13 नवंबर, 2008


ब्लॉग्स (1)
माचिस की तीली के ऊपर बिटिया की से पलती आगयौवन की दहलीज़ को पाके बनती संज्ञा जलती आग .********एक शहर एक दावानल ने निगला नाते चूर हुएमिलने वाले दिल बेबस थे अगुओं से मज़बूर हुएझुलसा नगर खाक हुए दिल रोयाँ रोयाँ छलकी आग !********युगदृष्टा से पूछ बावरे, ... आगे पढ़ें...