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5 नवंबर, 2008


ब्लॉग्स (1)
"विषय ,जो उगलतें हों विषउन्हें भूल के अमृत बूंदों कोउगलतेकभी नर्म मुलायम बिस्तर सेसहज ही सम्हलतेविषयों पर चर्चा करेंअपने "दिमाग" मेंकुछ बूँदें भरें !विषय जो रंग भाषा की जातिगढ़तें हैं ........!वो जो अनलिखा पढ़तें हैं ...चाहतें हैं उनको हम भूल जाएँकिंतु ... आगे पढ़ें...