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नवंबर 2008


ब्लॉग्स (5)
आ मीत लौट चलेंआ ओ मीत लौट चलें गीत को सुधार लेंवक़्त अर्चना का है -आ आरती संवार लें ।भूल हो गई कोई गीत में कि छंद मेंया हुआ तनाव कोई , आपसी प्रबंध मेंभूल उसे मीत मेरे सलीके से सुधार लें !छंद का प्रबंध मीत ,अर्चना के पूर्व होसमेटी सुरों का अनुनाद भी अपूर्व ... आगे पढ़ें...

माचिस की तीली के ऊपर बिटिया की से पलती आगयौवन की दहलीज़ को पाके बनती संज्ञा जलती आग .********एक शहर एक दावानल ने निगला नाते चूर हुएमिलने वाले दिल बेबस थे अगुओं से मज़बूर हुएझुलसा नगर खाक हुए दिल रोयाँ रोयाँ छलकी आग !********युगदृष्टा से पूछ बावरे, ... आगे पढ़ें...

b>पंकज स्वामी गुलुश नें बताया की ज्ञान जी ने अपना निर्णय सूना ही दिया की वे पहल को बंद कर देंगे कबाड़खाना ने इस समाचार को को पहले ही अपने ब्लॉग पर लगा दिया था. व्यस्तताओं के चलते या कहूं तिरलोक सिंहहोते तो ज़रूर यह ख़बर मुझे समय ... आगे पढ़ें...

"विषय ,जो उगलतें हों विषउन्हें भूल के अमृत बूंदों कोउगलतेकभी नर्म मुलायम बिस्तर सेसहज ही सम्हलतेविषयों पर चर्चा करेंअपने "दिमाग" मेंकुछ बूँदें भरें !विषय जो रंग भाषा की जातिगढ़तें हैं ........!वो जो अनलिखा पढ़तें हैं ...चाहतें हैं उनको हम भूल जाएँकिंतु ... आगे पढ़ें...

मुक्तिबोध की ब्रह्मराक्षस का शिष्य, कथा को आज के सन्दर्भों में समझाने की कोशिश करना ज़रूरी सा होगया है । मुक्तिबोध ने अपनी कहानी में साफ़ तौर पर लिखा था की यदि कोई ज्ञान को पाने के बाद उस ज्ञान का संचयन,विस्तारण,और सद-शिष्य को नहीं सौंपता उसे मुक्ति का ... आगे पढ़ें...