संगमरमर की चट्टानों, को शिल्पी मूर्ती में बदल देता , सोचता शायद यही बदलाव उसकी जिन्दगी में बदलाव लाएगा. किन्तु रात दारू की दूकान उसे गोया खींच लेती बिना किसी भुमिका के क़दम बढ जाते उसी दूकान पे जिसे आम तौर पे कलारी कहा जाता है. कुछ हो न हो सुरूर राजा सा ...
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