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16 अक्टूबर, 2008


ब्लॉग्स (1)
तुमजो आईने को अल्ल-सुबह मुँह चिढातीफिर तोते को पढाती ....!तुमजो अलसाई आँखें धोकरसूरज को अरग देतीं....!मुझे वही तुमनज़र आतीं रहीं दिनभरघर लौटा जो ...तुमको न पाकर लगाहाँ ....!तुम जो मेरी स्वप्न प्रिया होशायद मिलोगी मुझे आजरात के सपने में ...!उसी तरह जैसा ... आगे पढ़ें...