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अक्टूबर 2008


ब्लॉग्स (13)
"चिंता ही नहीं चिंतन भी : हालत-ए-महाराष्ट्र "काफ़ी हाउस में मित्रों के बीच हुई चर्चा के संपादित अंश आपसे शेयर करना चाहता हूँ" धर्मदेव", और राहुल राज , के मामलों के बीच झूलता है एक सवाल की क्या मेरा देश भी कबीलियाई संरचना की ,ओर जाने तैयार है..........? ... आगे पढ़ें...

दीपावली की धूमधाम भरी तैयारीयों में इस बार श्रीमती गुप्ता ने डेरों पकवान बनाए सोचा मोहल्ले में गज़ब इम्प्रेशन डाल देंगी अबके बरस बात ही बात में गुप्ता जी को ऐसा पटाया की यंत्र वत श्री गुप्ता ने हर वो सुविधा मुहैय्या कराई जो एक वैभव शाली दंपत्ति को को आत्म ... आगे पढ़ें...

धन को तरसता पूंजी-बाज़ार और जबलपुर जैसे कस्बाई शहर 500 के आसपास कारों का बिकना.एक अजीबोगरीब अर्थशास्त्रीय संरचना को देखकर आप भौंचक न हों समयांतर में इस आर्थिक संरचना को आप समझ पाएंगे की कहीं यह ... आगे पढ़ें...

जबलपुर दिनांक 22/10/2008जबलपुर विकास खंड के अंतर्गत नवीन प्रस्तावित निर्मल पंचायतों के 65 आँगनवाड़ी केन्द्रों के लिए आज एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्य शाला का आयोजन स्थानीय माखनलाल चतुर्वेदी सभागार में किया गया . कार्यशाला में प्रशिक्षण के दौरान ... आगे पढ़ें...

आओ मुझे बदनाम करो.....!!". "आओ मुझे बदनाम करो.....!!" उस दिन शहर के अखबार समाचार पत्रों में रंगा था समाचार "श्रींमन क के विरुद्ध जन शिकायतों को लेकर हंगामा, श्रीमान ख के नेतृत्व में आला अधिकारीयों को ... आगे पढ़ें...

संगमरमर की चट्टानों, को शिल्पी मूर्ती में बदल देता , सोचता शायद यही बदलाव उसकी जिन्दगी में बदलाव लाएगा. किन्तु रात दारू की दूकान उसे गोया खींच लेती बिना किसी भुमिका के क़दम बढ जाते उसी दूकान पे जिसे आम तौर पे कलारी कहा जाता है. कुछ हो न हो सुरूर राजा सा ... आगे पढ़ें...

(यह बोध कथा मेरी लिखी तो नहीं है पर जिसने भी लिखी है ज़बदस्त लिखी है कल ही मेरे घर सत्य साईं सेवा समिति के स्टडी-सर्कल में मेरे मित्र अविजय ने उदाहरण के तौर पर अपने वक्तव्य में कोड की जो आपके लिए सादर पोस्ट कर रहा हूँ रोचक बनाने के लिए कुछ हेरा फेरी कर ... आगे पढ़ें...

तुमजो आईने को अल्ल-सुबह मुँह चिढातीफिर तोते को पढाती ....!तुमजो अलसाई आँखें धोकरसूरज को अरग देतीं....!मुझे वही तुमनज़र आतीं रहीं दिनभरघर लौटा जो ...तुमको न पाकर लगाहाँ ....!तुम जो मेरी स्वप्न प्रिया होशायद मिलोगी मुझे आजरात के सपने में ...!उसी तरह जैसा ... आगे पढ़ें...

इस बीहड़ से गुज़रते मुझे बड़े ही डरावने से लगे थेओ समयतुम जो प्रिया के इंतज़ार के वक्तकितने अपने से .......?समय तुम ही न थे जो मुझे अपमानित कर गए थेहाँ तब जब माँ का शव लाया गयाऔर उभर आयीं थीनिस्तब्धाताएं एक साथ मेरे साथ तुम भी रुदन कर रहे थेहाँ और तब भी ... आगे पढ़ें...

14 अक्टूबर 1976 को पिता श्री भगवान दास सराफ - माता श्रीमती विमला देवी के घर दूसरी बेटी को रूप में जन्मी " भारती सराफ " जो एक दिन कत्थक का माइल -स्टोन बनेंगी कोई नहीं जानता था.... ! किंतु पत्थरों के इस शहर की तासीर गज़ब है कला साधना करते यहाँ कोई हताश कभी ... आगे पढ़ें...

नर्मदा के दर्शन को जाने वाले /नर्मदा परिक्रमा करने वाले,बुन्देल खंड के नर्मदा भक्त यात्री बमबुलियाँ गा के अपनें सफर की शुरुआत करतें हैं । ये आवाजें उन दिनों खूब लुभातीं थीं अल्ल सुबह जब "परकम्मा-वासी "[नर्मदा की प्रदक्षिणा करने वाले ] रेल से उतर कर सीधे ... आगे पढ़ें...

चिट्ठा-चर्चा" के बहाने :एक चर्चा और ! परहुई टिप्पणीपार सनेह प्रिय अज्ञातानंद जीसादर-अभिवादनआपका ख़त मिला पड़कर दुःख हुआ कि आप का ज़िक्र नही कर पाया अपनी एक पोस्ट पर भाई साहब ये सही है कि आपका भेजा हुआ वेतन जो ब्लॉगर की हैसियत से लिखने के लिए ... आगे पढ़ें...

गुजरात गुजरात के व्यापारियों ने सारे विश्व को अपने साथ साथ अपनी संस्कृति से परिचित कराया इतना ही नही उनको सर्व प्रिय बना दिया. गरबा गुजरात से निकल कर सुदूर प्रान्तों तथा विश्व के उन देशों तक जा पहुंचा है जहाँ भी गुजराती परिवार जा बसे हैं , मेरी महिला ... आगे पढ़ें...