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16 सितंबर, 2008


ब्लॉग्स (1)
हंसी आपकी आपका बालपन देख के दुनिया पशीमान क्यो...?रूप भी आपका,रंग भी आपकाफ़िर दिल हमारा पशीमान क्यों।निगाहों की ताकत तुम्हारी ही है इस पे मेरी ये आँखें निगाहबान क्यों..?तुम यकीनन मेरी हो शाम-ए-ग़ज़लइस हकीकत पे इतने अनुमान क्यों ?चलो इश्क की इक कहानी ... आगे पढ़ें...